ePaper Reading mode

Punjab Patrika ePaper

Tuesday, 13 October 2026

CM भगवंत मान के वायरल वीडियो मामले में ED का बड़ा कदम, लुधियाना पुलिस कमिश्नर स्वपन शर्मा को समन

CM भगवंत मान के वायरल वीडियो मामले में ED का बड़ा कदम, लुधियाना पुलिस कमिश्नर स्वपन शर्मा को समन

चंडीगढ़/लुधियाना। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से जुड़े कथित विवादित वायरल वीडियो और उसकी फोरेंसिक जांच रिपोर्ट को लेकर चल रहे मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने लुधियाना के पुलिस कमिश्नर एवं वरिष्ठ IPS अधिकारी स्वपन शर्मा को समन जारी किया है। उन्हें 19 अक्टूबर 2026 को चंडीगढ़ स्थित ED कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए कहा गया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह कार्रवाई उस मामले से जुड़ी है जिसमें कथित तौर पर वीडियो को AI से तैयार या एडिटेड साबित करने के लिए फर्जी फोरेंसिक और साइबर एनालिसिस रिपोर्ट तैयार कराने के आरोपों की जांच हो रही है। हालांकि, समन जारी होना अपने आप में किसी आरोप के साबित होने का प्रमाण नहीं है।

क्या है पूरा मामला ?

यह विवाद मुख्यमंत्री भगवंत मान से जुड़े एक कथित वीडियो के सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद सामने आया था। वीडियो को लेकर धार्मिक भावनाएं आहत होने के आरोप लगाए गए थे। विवाद बढ़ने पर मुख्यमंत्री मान ने वीडियो में दिखाई देने वाले व्यक्ति के रूप में अपनी पहचान से इनकार किया और इसे AI से तैयार किया गया या छेड़छाड़ वाला वीडियो बताया।

इसके बाद वीडियो की प्रामाणिकता और डिजिटल जांच रिपोर्टों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए। इसी पृष्ठभूमि में कथित फर्जी फोरेंसिक और साइबर विश्लेषण रिपोर्ट तैयार करने के आरोपों की जांच शुरू हुई। वीडियो की वास्तविकता और उसमें दिखाई देने वाले व्यक्ति की पहचान को अलग-अलग प्रश्नों के रूप में देखना जरूरी है।

स्वपन शर्मा को क्यों भेजा गया समन ?

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, जांच में यह आरोप भी सामने आया कि स्वपन शर्मा ने गुरुग्राम में कुछ विशेषज्ञों से मुलाकात की थी, ताकि विवादित वीडियो को AI-जनरेटेड बताने वाली रिपोर्ट तैयार कराई जा सके। इसी कथित भूमिका और मामले से जुड़े पहलुओं के बारे में जानकारी लेने के लिए ED ने उन्हें तलब किया है।

गुरुग्राम में सामने आए एक अन्य कथित वीडियो को लेकर भी राजनीतिक बयानबाजी हुई थी। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया था कि फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार कराने के लिए कथित समझौता हुआ। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का जवाब उपलब्ध होने तक इन्हें आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

गुरुग्राम पुलिस पहले ही कर चुकी है दो लोगों को गिरफ्तार

इस मामले में गुरुग्राम पुलिस ने पहले दो व्यक्तियों—अरुण मेहरचंद और अंकित—को कथित तौर पर फर्जी फोरेंसिक और साइबर एनालिसिस रिपोर्ट तैयार करने की साजिश से जुड़े आरोपों में गिरफ्तार किया था। मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि मामला गुरुग्राम में दर्ज FIR से जुड़ा है और जांच के दौरान रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया तथा उससे संबंधित तथ्यों की पड़ताल की जा रही है।

ED की कार्रवाई के संदर्भ में कथित वित्तीय लेन-देन और रिपोर्ट तैयार कराने से जुड़े पहलुओं की जांच भी महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, जांच के निष्कर्ष सामने आने से पहले किसी व्यक्ति की भूमिका को अंतिम रूप से तय करना उचित नहीं होगा।

अकाल तख्त की कार्रवाई से भी जुड़ा है विवाद

वीडियो को लेकर धार्मिक स्तर पर भी विवाद हुआ था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अकाल तख्त की ओर से कराई गई फोरेंसिक जांच में वीडियो को प्रामाणिक और AI से तैयार नहीं बताया गया था, जबकि मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी की ओर से वीडियो को लेकर अलग दावा किया गया। इस मुद्दे पर अकाल तख्त ने मुख्यमंत्री के खिलाफ धार्मिक टिप्पणी और कार्रवाई भी की थी।

इस प्रकार, विवाद में वीडियो की प्रामाणिकता, उसमें दिखाई देने वाले व्यक्ति की पहचान और कथित फर्जी रिपोर्ट तैयार कराने के आरोप—तीन अलग-अलग पहलू शामिल हैं। इन सभी पर जांच और संबंधित पक्षों के बयानों के आधार पर ही स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।

19 अक्टूबर की पेशी पर रहेगी नजर

अब ED के समक्ष स्वपन शर्मा की 19 अक्टूबर को होने वाली पेशी इस मामले में अहम मानी जा रही है। जांच एजेंसी उनसे कथित फोरेंसिक रिपोर्ट, गुरुग्राम में हुई मुलाकातों और मामले से संबंधित अन्य तथ्यों के बारे में पूछताछ कर सकती है। हालांकि, पूछताछ के संभावित विषयों और आगे की कार्रवाई को लेकर अंतिम जानकारी आधिकारिक बयान या जांच एजेंसी की पुष्टि के बाद ही स्पष्ट होगी।

नोट: यह समाचार उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। मामले में लगाए गए आरोप जांच के अधीन हैं और संबंधित व्यक्तियों की जिम्मेदारी सक्षम जांच या न्यायिक प्रक्रिया के निष्कर्षों से ही तय होगी।