लाइटें ठीक होने के बाद भी नहीं थमा विवाद, प्रॉपर्टी टैक्स और एनओसी के बकाया को लेकर लगे आरोप; सफाई कर्मचारियों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई धक्का-मुक्की
फाजिल्का: फाजिल्का नगर कौंसिल कार्यालय के मुख्य गेट के बाहर प्रताप बाग क्षेत्र की बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों और सफाई व्यवस्था को लेकर धरना देने के दौरान उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया, जब सफाई कर्मचारियों और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी बहस और हल्की धक्का-मुक्की हो गई। मामले में प्रॉपर्टी टैक्स और एनओसी के बकाया को लेकर भी आरोप-प्रत्यारोप सामने आए। हालांकि, नगर कौंसिल अधिकारियों और पार्षदों की मध्यस्थता के बाद स्थिति को शांत करवाया गया और बातचीत के पश्चात धरना समाप्त हो गया।
बंद स्ट्रीट लाइटों और गंदगी को लेकर जताया रोष
जानकारी के अनुसार, प्रताप बाग क्षेत्र में पिछले कई महीनों से स्ट्रीट लाइटें बंद होने और सफाई व्यवस्था खराब होने की शिकायतों को लेकर भूपिंदर सिंह नामधारी ने नगर कौंसिल अध्यक्ष के कार्यालय के बाहर धरना लगा दिया। उनका कहना था कि इलाके में अंधेरा रहने के कारण लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई थी। बार-बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा था।
उन्होंने क्षेत्र में सफाई व्यवस्था में सुधार और सार्वजनिक मूत्रालयों की उचित व्यवस्था करने की मांग भी उठाई। धरने की सूचना मिलने पर रमेश कटारिया सहित कुछ स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभालने का प्रयास किया।
अधिकारियों ने मौके पर करवाया लाइटों का काम
मामला नगर कौंसिल और बिजली विभाग के अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद कर्मचारियों को मौके पर भेजा गया। इसके बाद प्रताप बाग क्षेत्र की बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों को ठीक करवाने का काम किया गया। नगर कौंसिल के सैनिटरी इंस्पेक्टर अरोड़ा और अन्य अधिकारियों ने बताया कि स्ट्रीट लाइटों तथा पार्किंग से संबंधित समस्याओं का समाधान कर दिया गया है। इस दौरान प्रदर्शनकारियों को चाय-कॉफी भी पिलाई गई।
सफाई कर्मचारियों की एंट्री के बाद बढ़ा विवाद
धरने के दौरान नगर कौंसिल के सफाई कर्मचारी और वाल्मीकि समाज के प्रतिनिधि भी मौके पर पहुंच गए। सफाई कर्मचारियों और पार्षदों का आरोप था कि धरना लगाने से पहले उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई थी और सफाई कर्मचारियों के खिलाफ अनुचित तथा अपमानजनक टिप्पणियां की गई थीं।
दूसरी ओर, सफाई कर्मचारियों और अधिकारियों ने आरोप लगाया कि धरने के पीछे प्रॉपर्टी टैक्स और एनओसी से संबंधित बकाया विवाद भी एक प्रमुख कारण है। उनका दावा था कि संबंधित व्यक्ति टैक्स का भुगतान करने से बच रहे हैं। हालांकि, ये आरोप संबंधित पक्षों के दावे हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
इसी मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस और तकरार शुरू हो गई। देखते ही देखते मौके पर हल्की धक्का-मुक्की की स्थिति भी बन गई। माहौल बिगड़ता देख मौके पर मौजूद पार्षदों और अधिकारियों ने हस्तक्षेप किया और दोनों पक्षों को शांत करवाया। इसके बाद बातचीत के जरिए धरना समाप्त करवा दिया गया।
नगर कौंसिल अध्यक्ष बोले—धरने से पहले नहीं दी गई सूचना
मामले पर नगर कौंसिल अध्यक्ष ने बताया कि दिवाली के मद्देनजर शहर के विभिन्न इलाकों में मरम्मत और अन्य विकास कार्य चल रहे हैं। झांसी चौक पर खराब लाइटों को ठीक करने और बदलने का काम किया गया था। इसके बाद प्रताप बाग में भी लाइटों की मरम्मत का काम चल रहा था।
अध्यक्ष के अनुसार, कुछ लाइटों को अगले दिन सुबह ठीक किया जाना था, लेकिन बेमौसमी बारिश के कारण काम बीच में रुक गया। उन्होंने कहा कि प्रताप बाग की लाइटों का काम पहले ही ठीक किया जा चुका था, ऐसे में धरना लगाने से पहले नगर कौंसिल को सूचित किया जाना चाहिए था।
सफाई सेवक यूनियन के प्रधान ने क्या कहा?
सफाई सेवक यूनियन के प्रधान ने कहा कि शहर में लगातार सफाई अभियान चलाया जा रहा है और यह आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि धरने पर बैठे लोगों ने सफाई कर्मचारियों के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया, जिसके कारण विवाद बढ़ा।
फिलहाल, इस घटनाक्रम ने नगर कौंसिल की सफाई व्यवस्था, स्ट्रीट लाइटों के रखरखाव और सार्वजनिक शिकायतों के समाधान को लेकर सवाल खड़े किए हैं। वहीं, प्रॉपर्टी टैक्स और एनओसी से जुड़े आरोपों पर संबंधित पक्षों की स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।